हे नारी, तू शक्ती है, तू भक्ती है
तू ममता की, साक्षात मूर्ती है।
तुझसे निपजता सारा जीवन,
तूझमें विहरता सारा यौवन,
तू व्रूध्दों के लिए सेवा है,
तू हर सुखों की कर्ती है।
हे नारी….
तू प्रक्रूती की परिभाषा,
तू निसर्ग की परछाई,
तू भजन का भक्तीभाव है,
तू रणभूमी की स्फुर्ती है।
हे नारी….
तू है छाया, तू है धूप,
तू चंडी का रौद्र्रुप,
थर्राती तुझसे धरती है,
दिगदिगांत में तेरी किर्ती है।
हे नारी….
तू सिता के मन में समाई,
तू राधा के तन में समाई,
साधूसंत जिसे स्वर्ग कहतें है,
तू धरती पर वही मुक्ती है।
हे नारी….
—- © Prashen H Kyawal,
http://hindigazal.wordpress.com
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