हिंदी गझल

by प्रशेन ह क्यावल

सुबह से शाम तक March 8, 2008

सुबह से शाम तक गुनगुनाता रहुगा।
मै तेरे प्यार के गीत गाता रहुगा।

दुनिया ये चाहें रहे ना रहेगी,
मैं तुझें सदा याद करता रहुगा।

परवानें जलें ना जलें, शमां के वास्तें,
मैं तेरी नुरेंनजर पे जलतां रहूगा।

मुझे नही पर्वा, मिलने-बिछडनें की,
मेरी चाह के मैं तुझें प्यार करतां रहुगा।

—- © Prashen H Kyawal,
http://hindigazal.wordpress.com

 

One Response to “सुबह से शाम तक”

  1. mehhekk Says:

    bahut khub

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