सुबह से शाम तक गुनगुनाता रहुगा।
मै तेरे प्यार के गीत गाता रहुगा।
दुनिया ये चाहें रहे ना रहेगी,
मैं तुझें सदा याद करता रहुगा।
परवानें जलें ना जलें, शमां के वास्तें,
मैं तेरी नुरेंनजर पे जलतां रहूगा।
मुझे नही पर्वा, मिलने-बिछडनें की,
मेरी चाह के मैं तुझें प्यार करतां रहुगा।
—- © Prashen H Kyawal,
http://hindigazal.wordpress.com
bahut khub
kya likhte ho janaab.hemesha aise hi likhte rehna.