हिंदी गझल

by प्रशेन ह क्यावल

हँस के क्या देखा उन्होने February 24, 2008

हँस के क्या देखा उन्होने, के निशाने बन गए।
बात तो बस छेडी ही थी, और अफ़साने बन गए।

कहते थे दुसरोंको, मुहब्बत में क्या रखा है,
पीया जो एक प्याला, घरपे मैखाने बन गए।

वैसे तो वो हरदम नजर के सामने रहते थे,
अचानक ये क्या हुआ, उनके दिवाने बन गए।

खुदा करे हम अक्सर युँही बिमार रहा करे,
वैसे ही उनके आने के, वो बहाने बन जाए।

बाँहें फैलाए खडे ये नदी, हमआगोश करने के लिए,
उनका सागर कोई ऒर था, हम किनारे बन गए।

आते नही है लिखते कागज पे काले अक्षर,
तेरे गित गाते-गाते, हम भी शायर बन गए।

— © प्रशेन ह कयावल
http://hindigazal.wordpress.com

 

One Response to “हँस के क्या देखा उन्होने”

  1. mehhekk Says:

    beautiful,waise ek hi gazal ki tariff nahi,all of them r very nice.

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